उत्तर प्रदेश

जानिए क्या है योगी सरकार की ‘यूपी मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन’, ऐसे पाएं योजना का लाभ

जानिए क्या है योगी सरकार की ‘यूपी मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन’, ऐसे पाएं योजना का लाभ

उत्तर प्रदेश में मेडिकल क्षेत्र उपकरणों से लेकर दवाओं तक की खरीद में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने बीते मंगलवार को अस्पताल में सभी प्रकार की दवाइयों और उपकरणों की खरीद के लिए एक मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन गठित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

हाल ही में यूपी के गोरखपुर स्थित बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बड़ी संख्या में आक्सीजन की कमी से बड़ी संख्या में बच्चों की मौत हो गई थी, जिसके बाद ये फैसला लिया गया। 12 सितंबर को योगी कैबिनेट की बैठक में और चार प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई है।

आईएएस अधिकारी बनेंगे आपूर्ति निगम के प्रबंध निदेशक

सरकार के प्रवक्ता और चिकित्सा एवं राज्य स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा कि एक आईएएस अधिकारी को उत्तर प्रदेश चिकित्सा आपूर्ति निगम के प्रबंध निदेशक बनाया जाएगा और सभी चिकित्सा उपकरणों और दवाएं ई-निविदा की प्रक्रिया के माध्यम से खरीदेगी।

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यानी कि कहा गया कि अब ई-टेंडरिंग से स्वास्थ्य विभाग में खरीद होगी। उन्होंने बताया कि भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए दवाओं की लोकल परचेज की व्यवस्था खत्म होगी। इस योजना के अस्तित्व में आते ही केंद्रीय औषधि भंडार समाप्त हो जाएगा। वर्तमान में इस खरीद की रेट कांट्रेक्ट केंद्रीय औषधि भंडार द्वारा किया जाता है।

कुछ समय के लिए पुरानी व्यवस्था

स्वास्थ्य मंत्री के मुताबिक, जब तक कारपोरेशन काम शुरू नहीं करेगा, तब तक पुरानी व्यवस्था के तहत की दवाओं और उपकरणों की खरीद होती रहेगी। उन्होंने कहा कि कंपनियों के अधिनियम -301 के तहत निगम की स्थापना लगभग एक वर्ष तक होगी। इसलिए, सेंट्रल मेडिसिंस स्टोर्स डिपार्टमेंट (सीएमएसडी) पर दवाइयों और चिकित्सा उपकरणों की खरीद की मौजूदा व्यवस्था एक वर्ष के बाद खत्म हो जाएगी।

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योजना का कुल बजट

इसके लिए यूपी मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन बनाया जाएगा। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग में औषधि उपकरण खरीद प्रक्रिया में परिवर्तन का प्रस्ताव भी है। इस बार दवाइंया खरीद का कुल बजट 817 करोड़ रूपए है, जिसमें 500 करोड़ राज्य सरकार का बजट है और 300 करोड़ रुपये एनएचएम का है। 400 करोड़ रुपये का बजट मेडिकल उपकरणों की खरीद का है। कुल मिलाकर करीब 1200 करोड़ का बजट है। दवाओं के 800 करोड़ रुपये के बजट में से 80 फीसदी धनराशि की दवाएं सीएमओ के जरिए की जाती है जबकि 20 फीसदी राज्य स्तर पर की जाती है।

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किन राज्यो में हो चुकी सफल ये योजना

उत्तर प्रदेश सरकार का मानना है कि राजस्थान और तमिलनाडु में दवाओं और उपकरणों की खरीद व्यवस्था के लिए बनाया गया माडल सफल हो चुका है। जिसके बाद ही दवाओं की खरीद के लिए कारपोरेशन बनाकर सेंट्रलाइज करने का फैसला लिया गया है। इससे खरीद की क्षमता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार खत्म होगा।

इसके साथ ही इस बैठक में 14वें वित्त कमीशन की प्रधानमंत्री कृषि सिचाई योजना वाटरशेड डेवलपमेंट का भी प्रस्ताव पास किया गया। इसमें 612 परियोजनाओं के लिए 791.81 करोड़ का प्रस्ताव को मंजूरी दी है।

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