छत्तीसगढ़

जानिए क्या है छत्तीसगढ़ सरकार की मुख्यमंत्री बाल मधुमेह सुरक्षा योजना

जानिए क्या है छत्तीसगढ़ सरकार की मुख्यमंत्री बाल मधुमेह सुरक्षा योजना

छत्तीसगढ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने डॉ. भीमराव अम्बेडकर चिकित्सालय के सभागार में मुख्यमंत्री बाल मधुमेह सुरक्षा योजना का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने मधुमेह पीड़ित बच्चों को निःशुल्क इंसुलिन, किट वितरित किया। योजना के प्रथम चरण में दो हजार बच्चों को यह किट वितरित कर योजना का शुभारंभ किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री बाल मधुमेह सुरक्षा योजना छत्तीसगढ़ के मधुमेह पीड़ित बच्चों के लिए मील का पत्थर साबित होगी। इस योजना की शुरूआत मेरे लिए खुशी का बड़ा अवसर है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर अम्बेडकर चिकित्सालय और मेडिकल कॉलेज के लिए लगभग 30 करोड़ रूपये की लागत की विभिन्न सुविधाओं का लोकार्पण भी किया।


क्या है मुख्यमंत्री बाल मधुमेह सुरक्षा योजना

छत्तीसगढ़ राज्य सरकार ने मधुमेह पीड़ित बच्चों के लिए मुख्यमंत्री बाल मधुमेह सुरक्षा योजना का शुभारंभ किया। इस योजना के तहत राज्य के बच्चों को निःशुल्क इंसुलिन, ग्लूकोमीटर, ग्लूकोस्ट्रीप सहित आवश्यक सामग्रियों का किट वितरित किया।

राज्य में योजना के प्रथम चरण में, किट वितरित कर योजना दो हजार बच्चों को लाभ दिया गया। मधुमेह पीड़ित बच्चों के परिवार और बच्चों में एक ओर तो इस बीमारी के कारण तनाव रहता है तो दूसरी ओर दवाओं पर होने वाले खर्च का बोझ से परिवारों को राहत मिलेगी।

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मुख्यमंत्री बाल मधुमेह सुरक्षा योजना का उद्देश्य

योजना का उद्देश्य बाल मरीजों को मधुमेह से मुक्ति दिलाना है।

टाइप-1 मधुमेह से ग्रसित बच्चों की त्वरित जांच एवं पहचान करना।


रोगग्रस्त बच्चों को निःशुल्क इंसुलिन उपलब्ध कराना।

सभी टाइप-1 मरीजों को आरोग्य दर प्राप्त करवाना।


स्वस्थ्य जीवनशैली केंद्र द्वारा रोगियों को उचित सहायता एवं परामर्श प्रदान करना।


मधुमेह से संबंधित जटिलताओं की रोकथाम।


चिकित्सकों द्वारा नियमित जांच सुनिश्चित करना।


परिवार के सदस्यों को उन्हें इंसुलिन देने के लिए प्रशिक्षण देना।


मुख्यमंत्री बाल मधुमेह सुरक्षा योजना के पात्र

मुख्यमंत्री बाल मधुमेह सुरक्षा योजना में 0 से 14 वर्ष तक के बच्चों को पात्र बनाया जाएगा। योजना के तहत 21 वर्ष तक की आयु ऐसे बच्चों को इस योजना में निःशुल्क इंसुलिन प्रदान किया जाएगा।

मुख्यमंत्री बाल मधुमेह सुरक्षा योजना में पंजीयन

इसके लिए विभाग द्वारा टोल फ्री नम्बर 104 भी जारी किया जा रहा है। इसके माध्यम से मरीज अपना नाम एवं विस्तृत जानकारी दर्ज करा सकते हैं। टोल फ्री नम्बर नम्बर से पंजीयन कराने वाले मरीजों को विभाग द्वारा उचित परीक्षण किया जाएगा। एवं पुष्टि उपरांत ऐसे मरीजों को इस योजना का अंग बनाया जाएगा। इसके बाद उन्हें मुफ्त में इंसुलिन दी जाएगी।

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मधुमेह पर रोक नहीं

सामान्यतया मधुमेह दो प्रकार के होते हैं। टाईप-1 एवं टाईप-2। पहले प्रकार की मधुमेह का इलाज इंसुलिन से संभव माना जाता है। जबकि दूसरे प्रकार के इलाज में परेशानी आती है। बताया जाता है कि पूरे देश में लगभग 12 से 15 प्रतिशत लोग मधुमेह की चपेट में हैं।

इस अनुमान से छत्तीसगढ़ में करीब 20 लाख से अधिक लोग बीमारग्रस्त हैं। लोगों में अज्ञानता के चलते यह बीमारी फैल रही है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाये जाने वाला यह अभियान ऐसे बच्चों के लिए कारगर साबित हो सकता है।

मुख्यमंत्री बाल मधुमेह सुरक्षा योजना का बजट

मुख्यमंत्री बाल मधुमेह सुरक्षा योजना के लिए मुख्यमंत्री जी ने अम्बेडकर चिकित्सालय और मेडिकल कॉलेज के लिए लगभग 30 करोड़ रूपये की लागत की विभिन्न सुविधाओं का लोकार्पण भी किया। जिसमें से एक करोड़ 16 लाख रूपये की लागत का माडयुलर किचन, तीन करोड़ रूपये की लागत है।

पीडियाट्रिक आईसीयू डेढ़ करोड़ रूपये की लागत से स्थापित सीआर सिस्टम मशीन, एक करोड़ रूपये की लागत डीआर सिस्टम, चार करोड़ की लागत से छात्र पीजी छात्रावास, चिकित्सालय विस्तार के लिए 10 करोड़ रूपये की लागत से निर्मित नवीन भवन और चिकित्सालय महाविद्यालय के लिए 10 करोड़ रूपये की लागत से निर्मित भवन शामिल है।

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ऑनलाइन रहेगी मरीजों की निगरानी

स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि बाल मधुमेह रोगियों के लिए ऑनलाइन पेशेंट ट्रेकिंग सिस्टम विकसित किया जाएगा। इसके जरिये अस्पतालों में पहुंचने वाले मरीजों की मासिक डाटा एंट्री की जाएगी। बताया जा रहा है कि इससे मरीजों को दी जाने वाली इंसुलिन की निगरानी हो सकेगी। वहीं भंडार गृह में रखे गये इंसुलिन की समाप्ति तिथि का भी पता लगाया जा सकता है।

मरीज के परिजनों को दिया जाएगा रक्त शर्करा मापने का प्रशिक्षण

बाल मधुमेह योजना के अंतर्गत मरीज के परिजनों को बच्चों के शरीर में रक्त शर्करा परीक्षण मापने के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। ऐसे में मरीज के परिजन दिन में दो बार रक्त शर्करा की जांच कर सकते हैं। इसके लिए शर्करा जांच उपकरण एवं ग्लूकोस्ट्रिप मरीज को हर तीन महीने के लिए उपलब्ध कराई जाएगी। परिजनों के अतिरिक्त यदि मरीज खुद भी चाहें तो वे अपने शरीर में मधुमेह की जांच कर सकते हैं।

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