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जानिए क्या है बिहार सरकार की मछली बीमा योजना, मछली पालकों को मिलेगा मुआवजा

जानिए क्या है बिहार सरकार की मछली बीमा योजना, मछली पालकों को मिलेगा मुआवजा

अगर आप मछलियों का कारोबार करते है और बिहार राज्य से है तो यह योजना ख़ास आपके लिए है। जी हां, बिहार सरकार ने मछली कारोबार करने वाले लोगों के लिए एक ख़ास योजना की घोषणा की है। इस योजना का नाम मछली बीमा योजना है। जिसके जरिए अब आप मछलियों का भी बीमा करवा सकते है।

इस बीमा के तहत अगर आपकी मछली मर जाती है या फिर चोरी हो जाती है तो राज्य सरकार द्वारा उस हर्जाने की भरपाई की जाएगी। मतलब कि आपकी मछली के नुकसान को अब राज्य सरकार द्वारा मुआवजा के रुप में उठाया जाएगा।

दरअसल बिहार में मत्स्य निदेशालय ने एक प्रस्ताव तैयार किया है। इस प्रस्ताव के अनुसार मछलीपालन को भी अब कृषि का दर्जा मिल चुका है। ऐसे में मछलीपालकों को नुकसान से बचाने के लिए 2017-18 से नए प्रावधानों के आधार पर मछलियों को बीमा किया जाएगा।

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इस बीमा योजना के अनुसार मछली चाहे बीमारी से मरे या किसी प्राकृतिक आपदा, वज्रपात आदि से, मछलीपालक को मुआवजा दिया जाएगा। अगर आपकी मछली को किसी ने जहर देकर मार दिया हो या चोरी कर लिया हो इस पर भी आप मुआवजा पाने के अधिकारी होंगे।

क्या है मछली बीमा योजना

एक खबर के मुताबिक इस योजना में तालाबों की मछलियों जैसे रेहू, कतला, मृगाल, कोमन कार्प, सिल्वर कार्प और अन्य प्रमाणित नस्ल की मछलियों की सुरक्षा के लिए बीमा कराया जाएगा। बीमा अवधि के दौरान मछलियों के मरने पर उचित राशि किसानों को प्रदान की जाएगी।

बता दें बिहार ने वित्तीय वर्ष 2017-18 के एक नए प्रावधानों के आधार पर मछली पालकों को नुकसान से बचाने के लिए इस योजना का विस्तार किया है। योजना के तहत मछलियों को किसी भी तरह के नुकसान की भरपाई राज्य सरकार द्वारा की जाएगी। हालांकि इस योजना को मुख्यमंत्री की सहमति का इंतजार है, जिसके बाद ही इसे शुरु किया जाएगा।

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योजना क्रियान्वयन प्रक्रिया और भुगतान

इस पॉलिसी की बीमित राशि पहले ही निर्धारित कर ली जाती है जो मुख्य रुप से फ्राई फिंगर लिंग्स की लागत, अन्य आकस्मिक खर्च पर निर्भर है। प्रत्येक चरण की मूल्याकंन पॉलिसी में समाहित किया जाता है। बीता दावा का निपटारा इसी के आधार पर करना होता है। इस योजना के तहत पॉलिसी में बेसिक दर 2.4 प्रतिशत अधिकतम मूल्य पर लिया जाता है।

मगर बाढ़ जोखिम को शामिल करने पर 2 प्रतिशत अतिरिक्त प्रीमियम का भुगतान करना होगा। मछलियों की बीमा के लिए कृषकों को एक साल के लिए 1600 रुपए प्रीमियम के रुप में जमा करना पड़ेगा।

बीमा की अवधि फ्राई अवस्था से लेकर मछलियों के बड़े होने तक होती है। फ्राई से फिंगर लिंग्स तक तालाब में पल रही मछली के लिए 3 महीने तक का बीमा अवधी है। फिंगर लिंग्स से मछली अवस्था एवं ब्रिडर मछली के 1 से 5 वर्ष की अवस्था ब्रिडर तालाब में 12 महीने के लिए बीमा किया जा सकता है
।

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आवेदन प्रक्रिया

इस पॉलिसी के अंतर्गत दावा होने पर मछलियों के मृत्यु की सूचना बीमा कंपनी के निकटतम कार्यालय को देना होता है।

दावा के साथ मछलियों की मृत्यु प्रमाण पत्र, प्रयोगशाला प्रमाण पत्र तथा नुकसान का विस्तृत ब्यौरा उपलब्ध कराना होगा।

योजना के बड़े फायदे

मछलियों का बीमा होने से मछली पालकों को काफी लाभ मिलेगा।

बीमा द्वारा मछलियों को संरक्षण प्रदान किया जाता है ताकि विशेष स्थिति में क्षति होने पर उन्हें आर्थिक तंगी न झेलनी पड़े।

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