प्रधानमंत्री योजना

जानिए क्या है अमृत योजना, कैसे देश के हर गांव में होंगी शहर जैसी सुविधाएं


जानिए क्या है अमृत योजना, कैसे देश के हर गांव में होंगी शहर जैसी सुविधाएं

जानिए क्या है अमृत योजना, कैसे देश के हर गांव में होंगी शहर जैसी सुविधाएं


प्रधानमंत्री ‪नरेंद्र ‎मोदी ने कायाकल्प एवं शहरी रूपांतरण के लिए इस अटल मिशन “अमृत योजना “का ऐलान राजधानी में किया। इस योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार छोटे शहरों व कस्बों को या फिर शहरों के कुछ अनुभागों को चुनेगी।

वहां पर बुनियादी सुविधाएं स्थापित करेगी। मोदी के इस ड्रीम प्रोजेक्ट के लिये 5000 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है। प्रधानमंत्री ‪‎अमृत ‪‎योजना का पूरा नाम “अटलन वीनीकरण और शहरी परिवर्तन मिशन ” है।

इसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने जून 2015 को लांच किया था। इस मिशन का उद्देश्य देश के सभी शहरों में पानी की जलापूर्ति और सीवेज कनेक्शन प्रदान करना है। वित्त वर्ष 2015 से पांच वर्ष के लिए अमृत पर 5000 करोड़ खर्च करने का लक्ष्य रखा गया है।

क्या है अमृत ‪‎योजना

अमृत परियोजना के अंतर्गत जिन कस्बों या क्षेत्रों को चुना जायेगा वहां बुनियादी सुविधाएं जैसे- बिजली, पानी की सप्लाई, सीवर, सेप्टेज मैनेजमेंट, कूड़ा प्रबंधन,वर्षा जल संचयन, ट्रांसपोर्ट, बच्चों के लिये पार्क, अच्छी सड़क और चारों तरफ हरियाली, आदि विकसित की जायेंगी।

इनके अतिरिक्त ई-गवर्नेन्स के माध्यम से कई ऐसी सुविधाएं दी जायेंगी जो लोगों के जीवन को सुगम बनायेंगी। हर क्षेत्र के अंतर्गत नगर निकाय की कमेटियां होंगी, जो इस परियोजना को सफल बनाने की जिम्मेदारी उठायेंगी।

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मिशन में निम्नलिखित प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाएगाः

जलापूर्ति,

सीवरेज सुविधाएँ और सेप्टेज प्रबंधन

बाढ़ को कम करने के लिए वर्षा जल नाले,

पैदल मार्ग, गैर-मोटरीकृत और सार्वजनिक परिवहन सुविधाएँ, पार्किंग स्थल, और

विशेषतः बच्चों के लिए हरित स्थलों और पार्कों और मनोरंजन केन्द्रों का निर्माण और उन्नयन करके शहरों की भव्यता बढ़ाना।

कवरेज

अमृत के अंतर्गत पांच सौ शहरों को शामिल किया जायेगा| शहरों की सूची की अधिसूचना उपयुक्त समय पर जारी की जाएगी| उन शहरों की श्रेणी जिन्हें अमृत में शामिल किया जायेगा,

मिशन घटक

अम्रत के घटकों में क्षमता निर्माण, सुधार कार्यान्वयन, जलापूर्ति, सीवरेज और सेफ्टेज प्रबधन, वर्षा जल निकासी, शहरी परिवहन हरित स्थल और पार्क शामिल हैं। आयोजन के दौरान, शहरी स्थानीय निकायों को भौतिक अवसंरचना घटकों में कुछ स्मार्ट विशेषताओं को शामिल करने का प्रयास करना होगा।

जलापूर्ति

मौजूदा जलापूर्ति में वृद्धि करने जल शोधन संयंत्रों अरु सभी जगहों पर मीटर लगाने सहित वर्षा जल आपूर्ति प्रणाली,

शोधन संयंत्रों सहित पुरानी जलापूर्ति प्रणालियों का पुनर्स्थापन

विशेषतया पेयजल आपूर्ति और भूमिगत जल पुनःभरन के लिए जलाशयों क पुनरुद्धार

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उन क्षेत्रों सहित जिनमें जल की गुणवत्ता सम्बन्धी समस्याएँ है (उदाहणार्थ आरसेनिक, फ्लोराइड) दुर्गम क्षेत्रों, पहाड़ी और तटीय शहरों के लिए विशेष जलापूर्ति प्रबंधन।

सीवरेज

सीवरेज


मौजूदा सीवरेज प्रणालियों और सीवरेज शोधन संयंत्रों के संवर्द्धन सहित विकेंद्रीकृत, नेटवर्कबद्ध भूमिगत  सीवरेज प्रणालियाँ

पुरानी सीवरेज प्रणालियों और शोधन संयंत्रों का पुनर्स्थापन,

लाभकारी प्रयोजनों के लिए जल का पुनचक्रण और अपशिष्ट जल का पुनः उपयोग

सेफ्टेज

मल गाद प्रबंधन-कम लागत पर सफाई, परिवहन और शोधन
सीवर और सेफ्टिक टैंकों की यांत्रिकी और जैविक सफाई और प्रचालन की पूरी लागत वसूली

वर्षा जल निकासी
बाढ़ को कम करने और समाप्त करने के उद्देश्यों से नालों और वर्षा जल नालों का निर्माण और सुधार

शहरी परिवहन

अंतर्देशीय जल मार्ग (पोत/खाड़ी अवसंरचना के छोड़कर) के लिए जलयान और बस
गैर मोटरीकृत परिवहन (जैसे साईकिलों) के लिए फुटपाथ/पथ, पटरी, फुट ओवरब्रिज
बहुस्तरीय पार्किंग
हरित स्थल और पार्क
सुधार प्रबंधन और सहायता
सुधार कार्यान्वयन के लिए सहायता संरचना, कार्यकलाप और वित्तपोषण सहायता
स्वतंत्र सुधार मोनिटरिंग एजेंसियां

धनराशि का आबंटन

41 वित्त वर्ष 2015 –16  से 5 वर्ष के लिए अमृत के लिए कुल परिव्यय 50,000  करोड़ रु० है और मिशन को केन्द्रीय प्रायोजित स्कीम के रूप में संचालित किया |इसके बाद अमृत योजना को शहरी विकास मंत्रालय द्वारा शामिल किये गये मूल्यांकन के आलोक में और मिशन में मिले अनुभव शामिल करते हुए जारी रखा जाएगा|

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अमृत से जुड़ी महत्वपूर्ण कुछ महत्वपूर्ण तथ्य निम्न है

1- कस्बों का कायाकल्प करने वाली इस परियोजना का हर क्षेत्र में नियमित रूप से ऑडिट किया जायेगा।

2-बिजली का बिल, पानी का बिल, हाउस टैक्स, आदि सभी सुविधाएं ई-गवर्नेन्स के माध्यम से सुनिश्च‍ित की जायेंगी।

3-जो राज्य बेहतर ढंग से इस परियोजना को आगे बढ़ायेंगे उनके लिये बजट में 10 प्रतिशत तक का अवंटन किया जायेगा।

4-यह उसी कस्बे में लागू होगी, जहां की जनसंख्या एक लाख से ज्यादा है। 5-उन छोटे शहरों में लागू होगी, जहां से छोटी-छोटी नदियां गुजरती हैं।

5-उन पहाड़ी इलाकों व द्वीपों पर लागू होगी, जहां पर्यटन का स्कोप ज्यादा है।

6-जिन राज्यों की सरकारें इसे अच्छे ढंग से आगे बढ़ायेंगी उनके लिये बजट आवंटन भी बढ़ा दिया जायेगा।

7-अमृत के अंतर्गत वो परियोजनाएं भी आयेंगी, जो जेएनएनयूआरएम के अंतर्गत अधूरी रह गईं।

8-अमृत के अंतर्गत जेएनएनयूआरएम की अधूरी परियोजनाओं को 2017 तक पूरा किया जायेगा।

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