जानिए क्या है बैन पॉलीथिन अभियान, उत्तर प्रदेश में पॉलीथिन पर लगी रोक
उत्तर प्रदेश

जानिए क्या है बैन पॉलीथिन अभियान, उत्तर प्रदेश में पॉलीथिन पर लगी रोक

जानिए क्या है बैन पॉलीथिन अभियान, उत्तर प्रदेश में पॉलीथिन पर लगी रोक

योगी आदित्यनाथ ने सभी शासकीय दफ्तरों, अस्पतालों और स्कूल कॉलेजो में पान, गुटखे और तंबाकू के सेवन पर पाबंदी लगाने के निर्देश के साथ सरकारी कार्यालयों में पॉलीथीन का प्रयोग भी पूरी तरह से प्रतिबंध कर दिया। महानगरों में अंधाधुंध तरीके से प्रयोग की जाने वाली पॉलिथीन को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार सख्त है और शायद यही वज़ह है कि पॉलिथीन जैसी घातक उत्पाद पर कानून से लेकर सरकार भी सक्रिय नज़र आ रही है।

प्रदेश में पॉलिथीन की थैलियों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लागू कर दिया गया है। ये रोक हर तरह की प्लास्टिक थैलियों पर लागू है और इसमें पॉली प्रोपलीन और कपड़े की तरह दिखने वाली प्लास्टिक की थैलियां भी शामिल है। इसके अलावा निमंत्रण पत्र, किताबों और पत्रिकाओं को बांधने में प्रयोग की जाने वाली पारदर्शी या अन्य तरह की पॉलिथीन पर भी रोक लगाई गई है।

पॉलिथीन क्या है

प्लास्टिक एक प्रकार का पॉलीमार यानी मोनोमर नाम की दोहाराई जाने वाली इकाइयों से युक्त बड़ा अणु है। प्लास्टिक थैलों के मामले में दोहराई जाने वाली इकाइयां एथिलीन की होती हैं। जब एथिलीन के अणु को पॉली एथिलीन बनाने के लिए पॉलीमराइज किया जाता है।

वे कार्बन अणुओं की एक लंबी श्रृंखला बनाती है जिसमें प्रत्येक कार्बन को हाइड्रोजन के दो परमाणुओं से संयोजित किया जाता है। यह प्रदुषण के लिए बेहद घातक सिद्द होती है जो जलने पर पर्यावरण में कार्बनडाईऑक्साइड गैस छोड़ती है।

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गायों के पेट से निकलती पॉलिथीन

लखनऊ के कान्हा उपवन में हर रोज 3-6 गायों का पोस्टमार्टम किया जाता है जिनके पेट से 7-8 किलो के करीब पॉलिथीन निकलती है। आपने भी अक्सर देखा होगा की भारतीय संस्कृति के मुताबिक माता मानें जानें वाली गाय बड़े-बड़े कचरे के ढ़ेर से अपने लिए खाना ढूढकर खाती है। जिसमें वह कई पॉलिथीन भी निगल जाती है यही पॉलिथीन इनकी ज़ान की दुश्मन बन जाती है।

स्वास्थ्य के लिए घातक है पॉलीथिन

पॉलीथिन कचरे से देश में प्रतिवर्ष लाखों पशु-पक्षी मौत का ग्रास बन रहे हैं। लोगों में तरह-तरह की बीमारियां फैल रही हैं, जमीन की उर्वरा शक्ति नष्ट हो रही है तथा भूगर्भीय जलस्रोत दूषित हो रहे हैं। प्लास्टिक के ज्यादा संपर्क में रहने से लोगों के खून में थेलेट्स की मात्रा बढ़ जाती है।

इससे गर्भवती महिलाओं के गर्भ में पल रहे शिशु का विकास रुक जाता है और प्रजनन अंगों को नुकसान पहुंचता है। प्लास्टिक उत्पादों में प्रयोग होने वाला बिस्फेनॉल रसायन शरीर में डायबिटीज व लिवर एंजाइम को असामान्य कर देता है।

पर्यावरण चक्र पर गहरा प्रभाव

प्लास्टिक कचरा प्राकृतिक चक्र में नहीं जा पाता, जिससे पूरा पर्यावरण चक्र अवरुद्ध हो जाता है। पॉलीथिन पेट्रो-केमिकल उत्पाद है, जिसमें हानिकारक रसायनों का इस्तेमाल होता है।

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रंगीन पॉलीथिन मुख्यत: लेड, ब्लैक कार्बन, क्रोमियम, कॉपर आदि के महीन कणों से बनता है, जो जीव-जंतुओं व मनुष्यों सभी के स्वास्थ्य के लिए घातक है।

पॉलिथीन के नुकसान

1)    पॉलीथीन कई तरह से मानव जीवन और पर्यावरण के लिए नुकसानदेह है।

2)    पॉलिथीन का कचरा जलाने पर कार्बन डाई ऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड और डाई ऑक्सीन जैसी विषैली गैसे निकलती हैं जो पर्यावरण को दूषित करती है।

3)    पॉलिथीन कभी भी नष्ट नहीं होती इसलिए यह जमीन की उर्वराशक्ति को बहुत नुकसान पहुंचाती है।

4)    पॉलिथीन प्रोडक्ट में प्रयोग होने वाला बिस्फेनॉल कैमिकल ह्यूमन बॉडी में डायबिटीज और लीवर एंजाइम को प्रभावित करता है जिससे कैंसर, सांस लेने में तकलीफ़, त्वचा और खून में थेलेटस की मात्रा संभावित रुप से बढ़ जाती है।

5)    पॉलिथीन कचरा जमीन में दबने की वजह से वर्षा का जल भूमि में संचरण नहीं हो पाता।

6)    पॉलिथीन के थैलों के निर्माण में कैडमियम व जस्ता जैसी विषैली धातुऔं का प्रयोग होता है जो सीधे खाद्य पदार्थो को विशैल बना सकता है।

पॉलिथीन पर सरकार सख्त

एनवायरमेंट प्रोटेक्शन एक्ट, 2003 के तहत राज्य में पॉलिथीन पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसमें केवल 20 माइक्रोन से कम और 20 गुणा 30 वर्ग सेमी साइज से कम की पॉलिथीन ही प्रतिबंधित है।

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रंगीन पॉलिथीन को रिसाइकिल करने पर पर्यावरण को खरता रहता है इसलिए इस पर भी प्रतिबंध लगा हुआ है। वहीं खाने का सामान ले जाने के लिए पॉलिथीन बैग पूरी तरह से प्रतिबंधित है।

अखिलेश सरकार के सख्त कदम

पॉलिथीन को लेकर पिछली सरकार यानि की अखिलेश सरकार द्वारा भी कई ठोस कदम उठाए गए थे जिसमें शादी के कार्ड और किताबों पर पॉलिथीन कवर बैन कर दी गई थी।

वहीं सरकार ने सख्ताई बरतते हुए नियमों का उल्लंघन करने पर पांच लाख रुपए का जुर्मना और 6 महीने की कारावास की सज़ा का प्रावधान रखा था। बतातें चलें कि पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 एक्ट के तहत सज़ा का प्रावधान है।

कैसे रोके प्रदूषित खतरा

पॉलिथीन की थैलियों की जगह कपड़े या जूट की थैलियां इस्तेमाल में लाई जा सकती है। स्थानीय प्रशासन भी पॉलिथीन के उपयोग पर रोक लगाएं और इस पर सख्ती से पालन करें। पॉलिथीन देने वालों और लेने वालों दोनों पर जुर्माना किया जाए जैसे की कुछ राज्यों में किया जा रहा है।

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