जानिए क्या है उत्तर प्रदेश की गोमती रिवर फ्रंट परियोजना
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जानिए क्या है उत्तर प्रदेश की गोमती रिवर फ्रंट परियोजना

अपने अस्तित्व को खोती गोमती नदी की वर्तमान हालत किसी से छुपी नहीं, गोमती नदी के बचाव कार्य में जुटी तत्कालीन अखिलेश सरकार द्वारा बहुचर्चित योजना ‘गोमती रिवर फ्रंट विकास परियोजना’ का आह्वाहन तो बड़े ज़ोर शोर किया गया था।

लेकिन यूपी की सत्ता बदलते ही अखिलेश का ड्रिम प्रोजेक्ट सपनों में ही सिमट कर रह गया। 8 अप्रैल 2015 को अखिलेश सरकार द्वारा 3000 करोड़ रुपए की लागत से शुरु की गई परियोजना के हालतों पर चर्चा के लिए.. पढ़े हमारी ख़ास रिपोर्ट..

गोमती नदी का इतिहास और ख़ास जानकारी

गोमती नदी उत्तर प्रदेश की प्रमुख नदियों में से एक है इसे हिन्दु पुराणों के अनुसार गोमती को ब्रह्मर्षि वशिष्ठ की पुत्री माना गया है। इसका उल्लेख गीता में भी किया गया है। बता दें इसकी लंबाई 940 किमी है। वहीं नदी का अंत गाजीपुर के निकट गंगा नदी में है।

इसके अतिरिक्त नदी के किनारे बसे नगर लखनऊ और जौनपुर है। इसके अलावा जहां गंगा और गोमती नदी मिलती है वहां मार्कंडेय महादेव का मंदिर है। बतातें चलें गोमती नदी में यातायात नावों द्वारा मुहमदी तक होता है।

गोमती रिवर फ्रंट परियोजना का उद्देश्य

दरअसल गत वर्षों से गोमती नदी की स्थिति बेहद निंदनीय है यह पिछले कुछ समय से अपने अस्तित्व को बचाने में जुटी है। नदी अब नदी न रहकर नाला बनता जा रहा है। जिसे साफ करने के उद्देश्य से ही अखिलेश सरकार द्वारा चर्चित परियोजना ‘गोमति रिवर फ्रंट’ की शुरुआत की गई थी।
अखिलेश द्वारा गोमती के लिए उठाए गए ठोस कदम

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·       पूर्व राज्य सरकार में सिंचाई मंत्री रहे शिवपाल यादव द्वारा गोमती रिवर फ्रंट परियोजना की शुरुआत की गई थी।

·       यह अखिलेश सरकार की बहुचर्चित योजनाओं में से एक है।

·       तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गोमती रिवर फ्रंट परियोजना का लोकार्पण 16 नवंबर 2016 को किया था।

·       अखिलेश के इस ड्रीम प्रॉजेक्ट पर अब तक करीब 1,427 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं लेकिन परियोजना अभी भी अधूरी है।

·       परियोजना के तहत गोमती नदी के दोनों किनारों का सौंदर्यीकरण हुआ है।

·       नदी में पक्षियों को बसाने की भी योजना तैयार की गई है।

रिवर फ्रंट परियोजना

·       गोमती रिवर फ्रंट शहर के अंदर गोमती नदी के दोनों तटों पर कुड़िया घाट से लेकर लामार्टिनियर स्कूल तक 12.1 किमी का रिवर फ्रंट बना है।

·       गोमती बैराज के पास 300 मीटर का दायरा पूरा किया गया है।

·       रिवर फ्रंट को खूबसूरत बनाने के लिए गोमती किनारे पर पेड़ पौधे लगाए गए।

·       गोमती रिवर फ्रंट के किनारे गाड़िया खड़ी करने के लिए 300 कारों को पार्क करने के लिए पार्किंग बनाने की भी योजना है।

·       परियोजना के तहत गोमती नदी के किनारों पर डायफ्राम वॉल निर्मित कर नदी के पानी के बहाव को एक निश्चित रास्ता दिया गया है।

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·       इसके अलावा वॉटर वे एवं नदी के बंधे के बीच की उपलब्ध भूमि को सामुदायिक उपयोग के लिए विकसित किया गया है। इस विकसित की गई भूमि में साइकिल ट्रैक, जॉगिंग ट्रैक, वॉकिंग ट्रैक, किड्स प्ले एरिया के साथ साथ 500 मीटर पेयजल, टॉयलेट और पार्किंग की व्यवस्था की गई है।

·       योजना के अंतर्गत झील का विकास कर म्युजिक फाउंटेन, योग स्थल, वेडिंग ग्राउंड, 2 हजार लोगों की क्षमता का एक एम्फी थिएटर, क्रिकेट और फुटबॉल खेलने हेतु स्टेडियम का निर्माण किया गया है। उल्लेखनीय है कि यह स्टेडियम अपनी तरह का पहला स्टेडियम है जिसमें बैठने हेतु कंक्रीट और हार्ड मैटेरियल का प्रयोग न करके घास और पौधे लगाए गए हैं।

·       गोमती रिवर फ्रंट के साथ विकसित किए गए स्टेडियम का नाम देश के मशहूर लॉन टेनिल खिलाड़ी गौस मोहम्मद के नाम पर गौस मोहम्मद स्टेडियम पर रखा गया है।

·       लखनऊ शहर के लोगों के मनोरंजन एवं शहरी सौन्दर्यीकरण हेतु हार्डिंग ब्रिज, गोमती बैराज एवं लोहिया पुल पर आर.जी.बी. लाइटों का प्रयोग करके प्रकाश द्वारा सजावट का कार्य कराया गया है।

·       इसके अतिरिक्त गांधी सेतु पर रंगीन लाइटों के साथ साथ फव्वारा भी लगाया गया है।
गोमती नदी मौजूदा स्थिति
जब से राज्य सरकार बदली है तब से गोमती नदी की हालत बद्द से बदत्तर हो गई है यहां कि स्थिती निम्न चरणों से व्यक्त की जा रही है।

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·       गोमती नदी में जलकुम्भी और घाट पर गंदगी फैल रही है।

·       गोमती में कोई भी व्यक्ति नहाकर पवित्र नहीं बल्कि गंदा हो सकता है।

·       यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा गोमती के किनारों को खूबसूरत बनाने के लिए गोमती नदी का रिवर फ्रंट परियोजना तैयार कि गई थी जिसमें नदी की साफ सफाई कराई गई थी लेकिन मौजूदा हालत में यहां की स्थिति बेहद दयनीय है।

·       सपा सरकार में खूबसूरत दिखने वाली गोमती की सुंदरता भाजपा सरकार में धूमिल सी हो गई।

योगी ने किया था दौरा

पिछली 27 मार्च को वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोमती रिवर फ्रंट का दौरा किया था जहां योगी द्वारा सपा के कार्यकाल पर सवाल उठाए गए थे। निरिक्षण के दौरान सीएम ने गोमती में गंदे नाले के गिरने पर आपत्ति जताई थी।

सीएम योगी ने प्रॉजेक्ट में देरी और कथित अनियमितत की 45 दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे। वहीं वहां रह रहें दर्जनों लोगों के मुताबिक कहा गया था कि जब सपा सरकार थी तो गोमती नदी में समय समय पर सफाई की जाती थी वहीं योगी राज में यहां जगह जगह गंदगी फैल गई है।

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